बटुकोत्कीलन-पञ्चरत्न-स्तोत्रम्
भैरवो बटुको देव आपदुद्धारणस्तथा
देव देवो महा-रुद्रो भैरवः प्राण वल्लभः।।१।।
देव देवो महा-रुद्रो भैरवः प्राण वल्लभः।।१।।
क्रोध उन्मत्त मातङ्ग संहार भैरवस्तथा
कालः कपाल माली च भीषणो भैरवस्तथा।।२।।
कालः कपाल माली च भीषणो भैरवस्तथा।।२।।
कात्यायनी महा-गौरी हैमवत्यंश योगि-भैरव-माता च
भैरवी प्राण काल-भैरव-भार्या च काम-मोक्ष वीर-भैरव-
रोमाङ्गी शत्रु-सङ्कट योगिनी योग-माया च सर्व-भैरव कामिनी।
वल्लभा।।३।।
भैरवी प्राण काल-भैरव-भार्या च काम-मोक्ष वीर-भैरव-
रोमाङ्गी शत्रु-सङ्कट योगिनी योग-माया च सर्व-भैरव कामिनी।
वल्लभा।।३।।
पुरन्दरी। नाशिनी।।४।।
मोहिनी।
मोहिनी।
सर्व-वीर्य-महा-तेजाः सर्वत्र शुभ।
फल-श्रुति।। दायिनी।।५।।
फल-श्रुति।। दायिनी।।५।।
पञ्च-रत्नं पठेद् देवि! सर्वत्र विजयी भवेत्।
पुत्र-पौत्र-धनं धान्यं, सर्व रोग निवारणम्।।
पुत्र-पौत्र-धनं धान्यं, सर्व रोग निवारणम्।।

